Sunday, 12 August 2018

संक्षेपण एक कला हरदेव बाहरी | पल्लवन या विस्तारण Sankshepan Pallavan pdf book Hardev Bahri

संक्षेपण एक कला हरदेव बाहरी | पल्लवन या विस्तारण

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संक्षेपण एक कला हरदेव बाहरीनमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर आज हम आपके सामने हरदेव बाहरी की सबसे महत्वपूर्ण खंड को प्रस्तुत कर रहे हैं जो कि है: संक्षेपण एक कला हरदेव बाहरी, पल्लवन या विस्तारण
संक्षेपण एक कला




Sankshepan Pallavan pdf book Hardev Bahri
कलाएं ढेरों हैं और समय कम अपने ही देश में साहित्य विज्ञान इतिहास भूगोल राजनीति दर्शन आयुर्वेद आदि विषयों पर प्रतिवर्ष सैकड़ों पुस्तके छापी जाती इन्हें एक व्यक्ति नहीं पढ़ सकता अपने अपने विषय की पुस्तकें भी पड़ जाने की हिम्मत किसी में नहीं अंग्रेजी जर्मन फ्रेंच रूसी आदि भाषाओं में कई विषयों ग्रंथों के साथ प्रकाशित होते हैं ताकि जितना संभव हो पाठकों को एक संकलन ग्रंथ में बहुत सारा ज्ञान उपलब्ध हो सके हमारी जानकारी में भारत में अभी ऐसा कोई उपक्रम नहीं है लेकिन इस व्यस्त युग की मांग है तो एक न एक दिन होगा

कार्यालयों में चाहे वह सरकारी पत्र लेखन  हो या कंपनियों में और व्यवसायों में हो प्रतिदिन 50 और सैकड़ों पद प्रतिदिन प्रार्थना पत्र आदि आते रहते हैं कार्यालयों में प्रमुख उच्च पदाधिकारी निदेशक प्रबंधक सचिव या मंत्री सब कुछ नहीं देख पाते अधिकारी तो चाहता है कि सारी बातें संक्षेप में उसके सामने रखी जाए तभी कुछ विचार करके कोई निर्णय लेकर उचित कार्यवाही कर सकेगा उसे कई पत्रावलियां फाइलें देख कर अपना निर्णय देना पड़ता वापी को और छोटे अधिकारियों की दक्षता और ईमानदारी पर विश्वास रखता कि वे उसे संक्षेप में लिखकर सब कुछ समझा दें इसीलिए प्रतियोगी परीक्षाओं में संक्षेपण या संक्षिप्त लेखन अनिवार्य रूप से अपेक्षित होता है वर्षों से भाषा दक्षता के लिए परीक्षण में संक्षेपण का महत्व बराबर बना हुआ है बोर्डो और आयोगों की रिपोर्ट से लगता है बहुत संख्यक परीक्षार्थियों का यह कार्य संतोषजनक नहीं होता संक्षेप लेखन सचमुच एक कष्टसाध्य कला जो सतत अभ्यास करते रहने से ही आती है खेद है कि स्कूल-कालेजों मैं इस रचना विधि की उपेक्षा की जाती है मास्टर जी के पास इतना अवकाश नहीं है कि वह प्रत्येक छात्र का लेखन कार्य देखें और उसे उपयुक्त निर्देश दें वास्तव में यह कार्य स्कूलों के प्रारंभिक कक्षाओं से शुरू हो जाना चाहिए खेद है कि बिना तैयारी के प्रति परीक्षाओं में बैठ जाते हैं और सफल नहीं हो पाते

अनेक वाक्यांशों के स्थान पर एक शब्द रखने से 20 शब्दों की संख्या कम की जा सकती इसी कला को संक्षेपण बोलते हैं तो आइए उदाहरण से समझते हैं संक्षेपण एक कला
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1.राज भवन के अंदर महिलाओं का निवास

इस वाक्य को अगर एक शब्द में लिखा जाए: अंत:पुर

तो संक्षेपण द्वारा शब्दों की बचत:5

5 शब्द की आवश्यकता थी और जो है संक्षेपण लगाकर हम लोगों ने एक शब्द में ही अपना काम चला लिया

2. किसी देश के अंदर होने वाला या उससे संबंध रखने वाला

संक्षेपण शब्द: अंतर्देशीय

संक्षेपण द्वारा शब्दों की बचत: 8

3. कोई बात जो बढ़ा चढ़ाकर कही गई

संक्षेपण शब्द: अतिशयोक्ति

संक्षेपण द्वारा शब्दों की बचत: 7

4. जिसका मन किसी दूसरी जगह लगा हो

संक्षेपण शब्द: अन्यमनस्क

संक्षेपण द्वारा शब्दों की बचत: 6


5. जिसका या जिस के संबंध में कोई निर्णय ना हुआ हो

संक्षेपण शब्द: अनिर्णित

संक्षेपण द्वारा शब्दों की बचत: 9

6. जिसका कोई कहीं अंत ना होता हो

संक्षेपण शब्द: अनंत

संक्षेपण द्वारा शब्दों की बचत: 6

7 . मन में आपसे आप होने वाली प्रेरणा

संक्षेपण शब्द: अंतः प्रेरणा

संक्षेपण द्वारा शब्दों की बचत:5

8. तर्क के बिना मान लिया गया विश्वास

संक्षेपण शब्द: अंधविश्वास

संक्षेपण द्वारा शब्दों की बचत: 6

9. वह कवि जो तत्काल कविता कर डालता है

संक्षेपण शब्द: आशुकवि

संक्षेपण द्वारा शब्द की बचत:7

10 . एक वस्तु लेकर उसके बदले दूसरी वस्तु देना

संक्षेपण शब्द: विनिमय

संक्षेपण द्वारा शब्द की बचत:8

संक्षेपण की विधि

1. पहले दिया गया गद्यांश ध्यान से पूरी तरह पढ़िए और समझ लीजिए कि इसका विषय क्या है लेखक क्या कहना चाह रहा है, यदि आप गद्यांश के विषय को पूरी तरह समझ लिया है तो आपका आधा काम हो गया

2. एक बार यह अवश्य देख लेना चाहिए संक्षेपण करने के समय की मूल की कोई आवश्यक बात छूट तो नहीं गई अथवा कोई बात दोहराई या पुनरुक्त तो नहीं हो गई

3. वाक्य अथवा वाक्यांश को छोटा करने का ढंग है जैसे-

समाप्त होने तक- समाप्ति तक

जिस तरह का- जैसा

प्राप्त हो सकता है- मिल सकता है

इस तरीके से वाक्य में काट छांट करने पर अर्थ में कोई बदलाव नहीं आता है और संक्षेपण की विधि से आप अपने गद्यांश को छोटा या संक्षिप्त कर सकते हैं

4. कटाई छटाई के बाद अपना संक्षिप्त उल्लेख साफ-साफ लिख डालिए

5. भाषण या पत्राचार को भूतकाल में ढालना होता है

6. गद्यांश के अंदर कोई वार्तालाप यह कथन हो तो उसे परोक्ष कथन में परिवर्तित कर लेना चाहिए

7. जो लेख उत्तम पुरुष या मध्यम पुरुष में हो उसे अन्य पुरुष में लिखें

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उदाहरण के लिए:

संक्षेप करने के लिए गद्यांश( आपको अंतिम आधिकारिक पत्र लिखना है)

कौशांबी विश्वविद्यालय के कुलपति के उपकुलपति तथा सचिव विश्व विद्यालय परिषद डॉ रामकृष्ण शर्मा ने विश्वविद्यालय के महा कुलपति( राज्यपाल) को सूचित किया गया कि इस विश्वविद्यालय की परिषद कि एक असाधारण बैठक में उपकुलपति पंडित सुनील द्विवेदी के त्याग पत्र को स्वीकार करके उन्हें इस पद पर पुनः 3 वर्ष के लिए निर्वाचित किया है और निवेदन किया है कि महामहिम इस निर्णय को स्वीकृति प्रदान करें। इस पर राज्यपाल के सैनिक सचिव ने लिखा कि महा कुलपति चाहते हैं कि आप हमारे अवलोकनार्थ परिषद कि उक्त बैठक का पूरा कार्य विवरण और विश्वविद्यालय के विधान की प्रति भेजने का कष्ट करें उपकुलपति के कार्य विवरण और विधान की प्रतियां भेज दें तब महा कुलपति ने आपत्ति उठाई कि कुलपति का त्यागपत्र विश्वविद्यालय का प्रबंधन समिति के विचरोथ और रखा जाना चाहिए था, परिषद के सामने क्यों रखा गया योग्य की परिषद की साधारण बैठक क्यों बुलाई जबकि परिषद की वार्षिक बैठक होने तक कुलपति स्थानापन्न कुलपति का काम कर सकता था. उप कुलपति ने उत्तर दिया कि कुलपति ने लिखा था कि इस पद के लिए निर्धारित योग्यता मुझमें नहीं इसलिए त्यागपत्र दिया था कि कोई दूसरा उपयुक्त व्यक्ति चुना जाए.

अब मित्रों के आगर: करने पर मैं पुनः निर्वाचित होने को प्रस्तुत हूं. अंतिम पत्र में सैनिक सचिव ने सूचित किया की महा कुलपति इस निश्चय पर पहुंचे हैं कि परिषद की असाधारण बैठक बुलाना सर्वथा अनावश्यक था इसलिए विश्वविद्यालय के हित का ध्यान रखते हुए उपनिर्वाचन को स्वीकृति नहीं दी जा सकती।

शब्द संख्या 246


संo राo ११३ /०४- २०१८                                                                                     राज्यपाल भवन

                                                                                                                       उज्जैन

                                                                                                                      दिनांक:-१२-०८-२०१८

महोदय, महामान्य महा कुलपति को आपका संख्या उपo ३३१ /०४- २०१८ दिनांक १५ जुलाई २०१८ का पत्र प्राप्त हुआ, उन्होंने विश्व विद्यालय परिषद की १ जुलाई २०१८ की बैठक में हुए कुलपति निर्वाचन पर सब दृष्टियों से विचार किया है और वह अंत में इस निर्णय पर पहुंचे हैं कि कुलपति के निर्वाचन के लिए विश्व विद्यालय परिषद की बैठक बुलाना सर्वथा अनावश्यक और विश्वविद्यालय के हित के विरुद्ध था. अतः उन्होंने मुझे आपको यह सूचित करने का आदेश दिया है कि विश्वविद्यालय के हित को ध्यान में रखते हुए वह उक्त निर्वाचन को स्वीकार करने में असमर्थ हैं.


                                                                                                                          आपका विश्वासपात्र

                                                                                                                               देवेंद्र वर्मा

                                                                                                                    दैनिक सचिव, महामान्य

                                                                                                                              (राज्यपाल)

इस आधिकारिक पत्र को लिखने में 119 शब्दों का इस्तेमाल हुआ है जोकि संक्षेपण विधि से लिखा गया है

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पल्लवन या विस्तारण

पल्लवन क्या है?

संक्षेपण से उल्टी लेखन प्रक्रिया का नाम पल्लवन। संक्षेपण में एक बड़ी और लंबी सी रचना का छोटा संक्षिप्त करना होता है, तो इसके ठीक विपरीत पल्लवन में एक संक्षिप्त सी रचना या उक्ति को विस्तार से बताना पड़ता है. पल्लवन का अर्थ है फलना फूलना पनपना। पेड़ पौधे जैसे फलते-फूलते पनपते हैं कैसे? 120 में सब कुछ रहता है रूप रस गंध आदि. बस उसे रोकने की आवश्यकता है, उपयुक्त हवा पानी धूप लगने से वार्ता पनपता है फलता-फूलता उस बीच में नहीं सब गुड बाहर आ जाते हैं, ठीक इसी प्रकार एक छोटे से सूत्र सूत्र फार्मूला यह सुभाषित इतने गहन भाव या विचार नहीं रहते हैं कि वह आसानी से समझ में नहीं आती. जब आप चिंतन-मनन द्वारा अपना ध्यान लगाते हैं तो उनके अर्थ खुलते हैं पौधों के पत्तियों और फल फूलों की तरह और फिर फूलों की पंखुड़ियों की तरह अनेक सहचर भाव तथा विचार आने लगते हैं. सिद्धहस्त लेखक और मनीष वक्ता कम से कम शब्दों में ऐसी गुड बातें कह जाता है जो उस भाषा की सूक्तियां बन जाती है. कभी ऐसे नहीं और वृंद अपने दोनों में कबीर साहेब अपनी सखियों में और शब्दों में तुलसी अपनी चौपाइयों में यादों में और कुछ लेकर अपनी कृतियों में कोई महापुरुष अपने प्रवचनों और भाषणों में एक आधे वाक्य में इतनी बड़ी बात कह जाते हैं कि उसकी व्याख्या करने की गुंजाइश रहती है- उसके भाव को स्पष्ट करना पड़ता है. इस प्रक्रिया को पल्लव कहते हैं अर्थात सूत्रबद्ध और सुगठित भाव या विचार को विस्तार से प्रस्तुत करना। इस प्रकार पल्लवित गद्यांश एक छोटा सा निबंध हो जाता है

पल्लवन लेखन की विधि

१. पल्लवन लेखन विधि में दिए गए वाक्य या सुभाषित को अच्छी तरह पढ़िए उस पर चिंतन मनन कीजिए ताकि उसका अर्थ और अभिप्राय पूरी तरह से समझ में आ जाए

२. पल्लवन लेखन विधि में सोचिए कि इस युक्ति के अंतर्गत क्या क्या विचार या भाव आ गए हैं और आपके मन में इसके पक्ष में क्या-क्या विचार स्पष्ट हो रहे हैं क्या आप इस मूल कथन की पुष्टि में कोई उदाहरण दृष्टांत या प्रमाण दे सकते हैं?

३. पल्लवन लेखन विधि में विस्तार उसी बात का होना चाहिए जो मूल में हो जोड़ना उतना है जो निश्चित रूप से उसी विषय के अनुकूल

४. पल्लवन लेखन विधि में आप यह समझ लीजिए कि मूर्ति किसी लंबी-चौड़ी बात का निष्कर्ष स्वरूप है सोचिए कि विचारों के किस क्रम से यह बात अंत में कही गई होगी

५. आप पल्लवन लेखन मैं अपने लेख की पुष्टि के लिए उदाहरण भी दे सकते हैं जिनकी संगत उस विषय से निश्चित हो

६. पल्लवन लेखन विधि में अपना लेख बार बार दोहरा लें कोई शब्द कोई अक्षर मात्रा विराम चिन्ह छूटना गया हो ठीक कर ले

पल्लवन या विस्तारण का उदाहरण

अतिशय रगड़ करे जो कोई अनल प्रकट चंदन ते होइ।

पल्लवन:

शांत प्रकृति व्यक्ति भी अधिक चिढ़ने कोसने या तंग करने से सीख जाता है. आवेश में आ जाता है. कहां तक बर्दाश्त करेगा? चंदनं शीतलं होता है, पर उससे रगड़ा जाए तो उससे आग निकलेगी।




अधजल गगरी छलकत जाए भरी गगरिया चुपपे जाए

पल्लवन:

अपूर्ण ज्ञान हो तो आदमी अपनी विद्वता झाड़ता रहता है. वास्तव में जो विद्वान होता है वह तो गंभीर होता है. नदियां तो चलती हैं, समुद्र में गंभीरता होती। अच्छे आदमी खूब दिखावा करते हैं.




बिन मांगे मोती मिले मांगे मिले ना भीख

पल्लवन:

भाग्य से अपने आप अनैच्छिक प्रदार्थ मिल जाता है, और भाग्य नहीं है तो… कभी तो बैठे बिठाए कार्य सिद्ध हो जाता है और कभी बहुत हाथ पैर मारने पर भी कुछ हाथ नहीं आता




अलग पुरुष की माया कहीं धूप कहीं छाया

पल्लवन:

ईश्वर की लीला विचित्र है. कोई अमीर है कोई गरीब है कोई सुखी है कोई दुखी है. भाग्य खेल कहिए या ईश्वर की माया कहिए; समझ से बाहर है.

प्रयोजनमूलक हिंदी और उसका राजकाज में व्यवहार

प्रयोजनमूलक भाषा की कुछ प्रमुख विशेषताएं यह है-

१. यह भाषा समान भाषा से थोड़ी भिन्न होती है

२. शब्दों में अनेकार्थकता नहीं होती

३. शब्दों का प्रयोग सीमित क्षेत्र में होता है

४. इस भाषा में अलंकृत और लच्छेदार अभिव्यक्ति और मुहावरों का कोई स्थान नहीं
प्रयोजनमूलक हिंदी और उसका राज का व्यवहार के विषय में अधिक जानने के लिए हमारी संक्षेपण एक कला हरदेव बाहरी PDF डाउनलोड करें
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