Saturday, 26 May 2018

रस अलंकार छंद Download PDF free for Ras Alankar Chand in Detail

रस अलंकार छंद  
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Ras Alankar Chand in Detail 
This PDF of Ras Alankar Chhand is taken from Adhunik Hindi Vyakaran aur Rachna second part written by Dr. Vasudev Nandan Prasad. this PDF will be very useful for the competitive examination and the aspirants/ candidates  should enjoy reading and take a lot-lot of advantage/ profit from this PDF
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इस PDF में आपको मिलेगा आधुनिक हिंदी व्याकरण और रचना का  भाग-2 जोकि रचित है डॉक्टर वासुदेव नंदन प्रसाद द्वारा…. यह pdf कंप्लीट एग्जामिनेशन के लिए बहुत ही फायदेमंद होगा और इससे ज्यादा से ज्यादा डाउनलोड करके
और तैयारी करके  अधिक से अधिक लाभ उठाएं इस PDF में जो विषय सामग्री है वह निम्न है:
रस की परिभाषा Definition of Ras

रस का सम्बंध आनन्द से है कविता को पढने या नाटक को देखने से पाठक  श्रोता अथवा दर्शक को जो आनन्द प्राप्त होता है  उसे ही रस कहते है
रस का शाब्दिक अर्थ है - निचोड़। काव्य में आने वाला आनन्द अर्थात् रस लौकिक होकर अलौकिक होता है। रस काव्य की आत्मा है। संस्कृत में कहा गया है कि रसात्मकम् वाक्यम् काव्यम् अर्थात् रसयुक्त वाक्य ही काव्य है।

रस और उसका स्थाई भाव  प्राचीन भारतीय विद्वानों ने नौ रस माने है
रस का नाम    स्थाई भाव ( name of Ras and its quality)
श्रृंगार   रति (प्रेम
हास्य   हास
करूण   शोक
रौद्र     क्रोध
वीर     उत्साह
भयानक भय
वीभत्स जुगुप्सा (घृणा
अद्भुत   विस्मय
शान्त   निर्वेद
अलंकार की परिभाषा Definition of Alankar
काव्य की शोभा बढाने वाले तत्वों को अलंकार कहते है अर्थात् जिस माध्यम से काव्य की शोभा में वृद्धि होती है उसे अलंकार का नाम दिया जाता है
अलंकार अलंकृति  अलंकार:  अलम् अर्थात् भूषण। जो भूषित करे वह अलंकार है।

अलंकार के भेद  मुख्य रुप से अलंकार के दो भेद होते है शब्दालंकार  अर्थालंकार

शब्दालंकार की परिभाषा  जहाँ काव्य मे शब्द के माध्यम से काव्य की शोभा मे वृद्धि होती है  वहाँ शब्दालंकार होता है

अर्थालंकार की परिभाषा जहाँ काव्य में अर्थ के माध्यम से काव्य की शोभा मे वृद्धि होती है वहाँ अर्थालंकार होता है


छंद की परिभाषा Definition of Chhand
छंद शब्द का मुख्य अर्थबंधन है | गति, तुक, मात्रा, विराम आदि नियमो पर आधारित काव्य रचना को छंद कहा जाता है
छन्द संस्कृत वाङ्मय में सामान्यतः लय को बताने के लिये प्रयोग किया गया है।
छन्दों की रचना और गुण-अवगुण के अध्ययन को छन्दशास्त्र कहते हैं। चूँकि, आचार्य पिंगल द्वारा रचित 'छन्दःशास्त्र' सबसे प्राचीन उपलब्ध ग्रन्थ है, इस शास्त्र को पिंगलशास्त्र भी कहा जाता है।

छंद के प्रकार- मुख्यत: छंद के निम्न भेद है
(i) वर्णिक छंदकाव्य में वर्णो की निश्चित गणना के आधार पर रचे गए छंद वर्णिक छंद कहे जाते हैं | उदाहरणअनुष्टुप्, मालिनी , शिखरिणी , घनाक्षरी आदि |
(ii) मात्रिक छंदमात्रिक छंद उसे कहते है जिसमें प्रत्येक चरण में मात्राओं की संख्या निश्चित होती है | उदाहरणदोहा ,सोरठा ,रोला , चौपाई आदि |
(iii) मुक्त छंदजिस रचना में वर्ण और मात्रा का कोई बंधन नहीं होता है, उसे मुक्त छंद कहते है |

मात्रावर्णो के उच्चारण में जो समय लगता है, उसे मात्रा कहते है |

इसके दो भेद हैं-
(i) हृस्व- हृस्व वर्ण के उच्चारण में कम समय लगता है | इसकी एक मात्रा होती है| इसे लघु भी कहा जाता है | लघु का संकेत ‘|’ है |
,,, लघु के उदहरण है |

(ii‌) दीर्घदीर्घ वर्ण में हृस्व का दुगुना समय लगता है | इसकी दो मात्रा होती है |इसे गुरु भी कहा जाता है | दीर्घ वर्ण का संकेत ‘s’ है |
,,,,,, दीर्घ के उदाहरण है |
1.सोरठा छंद की परिभाषा
यह दोहे का उल्टा होता है | सोरठा के पहले तीसरे चरण में 11-11 मात्राएँ तथा दूसरे और चौथे चरण मे 13-13 मात्राएँ होती हैं |

सोरठा छंद का उदाहरणExample of Sortha 
i- s l l l l l l s l
जो सुमिरत सिधि होइ, = 11 मात्राएँ
l l s l l l l l l l l l
गननायक करिवर बदन | = 13 मात्राएँ
l l l l s l l s l
करहु अनुग्रह सोय , = 11 मात्राएँ
s l s l l l l l l l l


बुद्धि-रासि सुभ-गुन-सदन | =13 मात्राएँ
2. रोला छंद की परीभाषा
रोला सम मात्रिक छंद है | इसमें चार चरण होते है तथा प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती है | 11 और 13 मात्राओं पर यति होती है |

रोला छंद का उदाहरणExample Of Rola Chhand

s l s l l l s l s l l l l l l l s l l
कोउ पापिह पँचत्व, प्राप्त सुनि जमगन धावत |=24 मात्राएँ
l l l l s l l s l l l l s s l l s l l
बनि बनि बावन बीर, बढ्त चौचंद मचावत || =24 मात्राएँ
s l l s s s l l l l s s l l s l l
पै तकि ताकी लोथ , त्रिपथगा के तट लावत |=24 मात्राएँ
s s s l l s l s l s l l l l s l l
नौ व्दै ग्यारह होत, तीन पाँचहिं बिसरावत || =24 मात्राएँ
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रस अलंकार छंद हरदेव बाहरी | Ras Alankar Chhand Hardev Bahri

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